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समय विशेष - महामौत का साक्षात अवतार - कोविड - 19
March 27, 2020 • श्रीगोपाल गुप्ता

सुनहरा संसार

                 बड़े भाग मानुष तन पावा........ 

    

महामौत के साक्षात अवतार कोविड-19 कोरोना वायरस से लगभग सम्पूर्ण विश्व थर्रा गया है! जिस देश में देखो,जहां देखो आधूनिक रावण 10 सिरों के साथ भयानक अट्टहास कर रहा है और आम और खास आदमी अपने निकट महामौत को देखकर सहमा सा खड़ा है! गत वर्ष दिसम्बर 20 को चीन से निकले कोरोना ने देखते-देखते विश्व के लगभग 183 देशों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है!चारो तरफ मौत के खौफ का इतना भयानक मंजर हो गया है कि देखते पूरी दुनिया में पांच लाख लोग इसके शिकार हो गए हैं जबकि तकरीबन 22000 से ज्यादा लोग  इसकी चपैट में आकर अपना जीवन त्याग चुके हैं |

 भारत भी इसकी चपैट में आकर अपने 17 लोगों को असमय गंवा चुका है जबकि उसके 694 लोग इससे पीड़ित हैं! चिंता की बात यह है कि देश में दिनों-दिन कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है! मगर इसके साथ ही एक अच्छी खबर यह भी है कि देश की सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें अपने नागरीकों को इसकी हद से बचाने के लिये युद्ध स्तर पर मैदानी क्षेत्रों में कूंद गई हैं! जिसका नतीजा सामने आ रहा है कि मरीजों की संख्या तो दिनों-दिन बढ़ रही है मगर अन्य देशों के मुकाबले यह संख्या काफी कुछ हद तक बहुत कम है! केन्द्र सरकार और विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहले एक दिन का जनता कर्फ्यू और फिर 21 दिन का देशव्यापी लाॅकडाऊन काफी हद तक कोरोना वायरस से लड़ने में कारगर हथियार साबित हो रहा है! लोकतंत्र की सबसे बड़ी और मजबूत गांरटी देश की जनता के लिए केन्द्र व राज्य सरकारों ने बिना किसी नुकसान फायदे की चिंता किये बगैर अपने खजाने और संसाधनों को पूरी तरह से खोल दिया है! देश के तमाम अफसरान व सरकारी अमला बिना किसी भय और भेदभाव के पूर्ण युद्ध स्तर पर जनता को कोरोना से बचाने के लिये अपने पास सीमित संसाधनों के बावजूद कमर कसकर खड़ा हो गया है! 

इसके साथ ही देश व विशेषकर चम्बल की धरा के मुरैना के मूर्तध्न्य समाजसेवियों ने दुःख और आपदा की इस घड़ी बिना अपनी जान की परिवाह किये इस लाॅकडाऊन में जिले की जनता को कोरोना से बचाने के लिये तन, मन और धन से समर्पित होकर जिला प्रशासन के कंधों से कंधा मिलाकर तन कर खड़े हो गये हैं! इन्होने यह साबित कर दिया है "बड़े भाग मानूष तन पावा, सुर दुर्लभ संदग्रथ हि गावा! अर्थात भाग्य से यह मनुष्य जीवन मिलता है जो देवताओं को भी दुर्लभ है, इस मनुष्य जीवन को जनहित में सार्थक कर सकें, यही इस जीवन का उद्देश्य है! और ये कर दिखाया मुरैना के दानवीर ज्ञात- अज्ञात दानवीर कर्णों ने!प्रधानमंत्री की अपील कि 21 दिन तक पूर्ण रुप से घर से न निकलें, क्योंकि करोना से लड़ाई का यही एकमात्र हथियार है! ऐसे में चाहें दलित बस्ती हो या फिरधननाढ्यों की काॅलोनी या फिर जरुरत की चीजों से महरूम परिवार, सबके लिये घर पर ही खाद्य सामग्री और जरुरत का सामान बिना किसी फायदे के यह दानवीर कर्ण पहुंचा रहे हैं! भूखों और मजदूरों को मुफ्त राशन और खाने का लगातार वितरण हो रहा है! मगर दुःखद यह भी है कि आपदा की इस खौफनाक घड़ी में देश ने कम से कम मुरैना व चम्बल संभाग ने एक वर्ग जो अपना है, के काले चेहरों को भी देख लिया है! इस अकल्पनीय क्षणों में जब देश में महामारी आपातकाल लगा हुआ और देश को चिकित्सकों की कदम-कदम  पर जरुरत है! मगर  ख्यातिप्राप्त सभी प्राईवेट चिकित्सकों ने मरीजों से मूंह मोढ़ लिया है! इस आपदा में जहां प्राईवेट अस्पताल और नर्सिगहोम राउण्ड ओ क्लाॅक खुले रहने चाहिये, मगर वे बंद हैं! हालात यह हैं कि विना कोरोना से पीड़ित हुये इन निजी चिकित्सकों को ने मरीजों को भी उनके हाल पर छोड़कर खुद को परिवार सहित आयसोलेट कर लिया है! जबकि भारत आयुविज्ञान परिषद् से डिग्री लेने वाले और शपथ खा लेने वाले ये चिकित्सक भूल गये कि वे किसी स्थिति-परिस्थिति में मरीजों से मूंह नहीं मोढ़ सकते! मगर इनके खिलाफ कार्यवाही कोन करे? जो सक्षम अधिकारी हैं वे खुद नर्सिंगहोम का संचालन कर रहे हैं! ये स्थिति पूरे देश में है क्योंकि पीड़ितों का हब बन चुके महाराष्ट्र सरकार स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे निजी चिकित्सकों से अपने अस्पताल और नर्सिंगहोम खोलने और मरीजों को देखने की अपील कर चुके हैं! मगर नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा! इन बड़े-बड़े डिग्री होल्डर निजी चिकित्सकों के कान पर जूं तक नहीं रैंगी !