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कांग्रेस के पोस्टर बार पर सिंधिया करारे जवाब की तैयारी में!
May 25, 2020 • Jitendra parihar

सुनहरा संसार 

ज्योतिरादित्य सिंधिया लंबे अतंराल के बाद 1 जून को मध्य प्रदेश आ रहे हैं, संभावना जताई जा रही है कि वे शिवराज कैबिनेट के विस्तार में भी मौजूद रहेंगे, इस दौरान भारी संख्या में कांग्रेसी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करेंगे । ऐसे में कांग्रेस द्वारा सिंधिया की गुमशुदगी के नाम पर फेंका गया राजनीतिक पांसा एक बार फिर उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। 

 

 

 प्रदेश में 24 सीटों पर होने वाले उप चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस दोंनों दल अपने - अपने तरीके से सक्रिय हो चुके हैं । जहां भाजपा आंतरिक तरीके से काम करके पार्टी में शामिल सिंंधिया समर्थक विधायकों के साथ सभी सीटों पर विजय पताका लहराने की तैयारी में जुटी है। वहीं कांग्रेस एक तरफ सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों पर पार्टी से दगाबाजी के आरोपों को हथियार बनाकर तो दूसरी ओर सिंधिया के भाजपा में शामिल होने से नाराज चल रहे नेताओं पर डोरे डालकर फिर से सत्ता हथियाने की कोशिश में जुट गई है। 

हाल ही में कांग्रेसियों द्वारा सिंधिया और पूर्व महिला बाल विकास मंत्री इमरती देवी के गुमशुदगी के पोस्टर छाप कर चिपकाए गए। कांग्रेसियों का ये कदम न सिर्फ सिंधिया समर्थकों को नागवार गुजरा बल्कि भाजपा ने भी इसे गंभीरता से लिया, फलस्वरूप जिला अध्यक्ष अमर माखीजानी ने स्वयं थाने पहुंच कर एफआईआर दर्ज कराई ।

 दरअसल इस उप चुनाव की असली कमान सिंधिया के हाथों में ही होगी इसलिए सिंधिया के बर्चस्व वाली अंचल की 16 सीटों पर कांग्रेस की निगाह टिकी हुई है , यही वजह है कि गाहे-बगाहे कांग्रेस सिंधिया और उनके विधायकों को टार्गेट कर हमले की रणनीति पर काम कर रही है। लेकिन जानकारों की मानें तो कांग्रेस के पास ऐसा कोई चैहरा नहीं जिसको आगे करके कांग्रेस अपने आरोपों को जनता के बीच सही ढंग से प्रस्तुत कर सके। 

आज प्रदेश कांग्रेस में जिन्हें प्रमुख के रूप में दिखाया जा रहा है उनमें पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह हैं, इनमें मुख्यमंत्री रहते हुए कमलनाथ प्रदेश के अन्य जिलों में विकास कार्यों के लिए फंड का रोना रोते रहे और छिंदवाड़ा के लिए खजाना खोले रहे , यह आरोप सिंधिया समर्थक मंत्री और सभी विधायकों ने लगाए थे। 

 तो दिग्गी राजा के मुख्यमंत्री काल को जनता आज भी नहीं भुला पा रही है, जिनकी भाजपा पहले ही मिस्टर बंटाढार के रूप में छबि बना चुकी है, यही वजह थी कि 2018 के विधानसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह को बैठाकर सिंधिया का चैहरा आगे किया गया। 

ऐसे में बिना सैनापती और सैना के कांग्रेस तेजतर्रार सिंधिया और भाजपा से मुकाबला कैसे करेगी ये समय के गर्भ में है। लेकिन सिंधिया पर कांग्रेस के सीधे हमले को सिंधिया समर्थकों और भाजपा ने दिल पर ले लिया ये साफ है। सूत्ररों की माने तो सिंधिया के इशारे की ताक में बैठे ग्वालियर चंबल संभाग से कांग्रेस के कई दिग्गज नेता भोपाल में सिंधिया की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम सकते हैं ।

खबर है कि अब तक दिल्ली में शांत रहकर लोंगों की मदद कर रहे भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस की इस हरकत का करारा जवाब देने के लिए पार्टी नेताओं के साथ रणनीति बनाकर बहुत जल्द अपने वफादार समर्थकों को भाजपा में शामिल करने के लिए विशेष अभियान छेडेंगे।